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अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ)

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ)

प्रसंग

जनवरी 2026 में, इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने भारत के लिए अपने ग्रोथ अनुमानों को ऊपर की ओर बढ़ाया, जो देश की मज़बूत आर्थिक रफ़्तार को दिखाता है। भारत ग्लोबल माहौल में एक "ब्राइट स्पॉट" बना हुआ है, जो दूसरे बड़े उभरते बाज़ारों से बेहतर परफ़ॉर्म कर रहा है।

 

समाचार के बारे में

  • ग्रोथ प्रोजेक्शन: IMF ने फिस्कल ईयर 2025–26 के लिए भारत के लिए अपने GDP ग्रोथ फोरकास्ट को अपग्रेड करके 7.3% कर दिया है (पहले के 6.6% के अनुमान से ज़्यादा)।
  • मुख्य कारण: यह 0.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी तीसरी तिमाही में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन और वित्तीय वर्ष की अंतिम तिमाही में मजबूत गति को दर्शाती है।
  • महंगाई: रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि खाने की चीज़ों की कीमतों में गिरावट से महंगाई 4% के टारगेट लेवल पर वापस जाएगी।
  • ग्लोबल संदर्भ: हालांकि भारत आगे है, IMF का अनुमान है कि 2026 तक ग्लोबल ग्रोथ लगभग 3.3% पर मज़बूत रहेगी, जिसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और टेक्नोलॉजी में निवेश से बढ़ावा मिलेगा।

 

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ)

IMF एक ग्लोबल फाइनेंशियल वॉचडॉग के तौर पर काम करता है, जो इंटरनेशनल मॉनेटरी स्टेबिलिटी बनाए रखने के लिए लोन और इकोनॉमिक एनालिसिस देता है।

  • शुरुआत: 1944 में ब्रेटन वुड्स कॉन्फ्रेंस (वर्ल्ड बैंक के साथ) के ज़रिए शुरू हुई।
  • मेंबरशिप: इसमें 190+ देश शामिल हैं ।
    1. नोट: वर्ल्ड बैंक में शामिल होने के लिए IMF की मेंबरशिप ज़रूरी है।
  • मुख्य रिपोर्ट:
    1. वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक (WEO): साल में दो बार पब्लिश होता है, जिसमें समय-समय पर अपडेट होते हैं (जैसे जनवरी 2026 का अपडेट)।
    2. ग्लोबल फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट (GFSR): ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम के लिए रिस्क का आकलन करती है।
    3. फिस्कल मॉनिटर: पब्लिक फाइनेंस डेवलपमेंट का सर्वे करता है।
    4. एक्सटर्नल सेक्टर रिपोर्ट: एक्सचेंज रेट और एक्सटर्नल इम्बैलेंस का एनालिसिस करती है।

 

चुनौतियाँ और भविष्य का दृष्टिकोण

  • आगे नरमी: 2026-27 में विकास दर 6.4% तक कम होने का अनुमान है क्योंकि चक्रीय और अस्थायी कारक (जैसे महामारी के बाद मांग का सामान्य होना) कम होने लगेंगे।
  • बाहरी जोखिम: IMF ने चेतावनी दी कि ग्लोबल ट्रेड पॉलिसी में बदलाव, टैरिफ और जियोपॉलिटिकल तनाव उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए बड़ी "मुश्किलें" बने हुए हैं।
  • AI का असर: IMF का अनुमान है कि AI अपनाने से मीडियम टर्म में ग्लोबल ग्रोथ हर साल 0.8 परसेंटेज पॉइंट तक बढ़ सकती है ।

 

निष्कर्ष

IMF का नया ऊपर की ओर बदलाव दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली बड़ी इकॉनमी के तौर पर भारत की जगह को दिखाता है। मज़बूत घरेलू डिमांड और स्ट्रेटेजिक टेक्नोलॉजिकल इन्वेस्टमेंट के बीच बैलेंस बनाकर, भारत ग्लोबल ट्रेड की अनिश्चितताओं से अच्छे से निपट रहा है और खुद को इंटरनेशनल ग्रोथ के मेन इंजन के तौर पर बना रहा है।

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